हरिद्वार
जगत महारानी राधा रानी की अष्टमी के अवसर पर विशाल संत भंडारे का आयोजन सतगुरु तारणहार है —-श्याम अदलखा
उपासना तेश्वर
हरिद्वार भूपतवाला स्थित श्री उदासीनकार्षणी नारायण आश्रम में जगत महारानी राधा रानी अष्टमी के अवसर पर परम पूज्य गुरुदेव त्याग मूर्ति परम तपस्वी ज्ञान मूर्ति 1008 श्री श्री गुरुशरणानन्द जी महाराज के पतित पावन सानिध्य में एक विशाल संत भंडारे का आयोजन किया गया इस अवसर पर बोलते हुए श्री अम्बादत्त पुजारी ने कहा इस पृथ्वी लोक पर हरि भजन से बढ़कर मनुष्य जीवन की कोई और बड़ी निधि हो ही नहीं सकती वह मनुष्य के इस लोक में भी काम आती है और परलोक में भी काम आती इस अवसर पर बोलते हुए श्री श्यामअदलखा जी ने कहा इस संसार में सतगुरु गंगा की वह पावन धार है जिनके ज्ञान रूपी सरोवर में स्नान करने के बाद भक्तों का जीवन धन्य तथा कृतार्थ हो जाता है गुरु बिना ज्ञान नहीं और गुरु बिना कल्याण नहीं और गुरु बिना गति नहीं सतगुरु तारण हार है सतगुरु ही मेरे राम सतगुरु भव की नाव है जो चढ़े सो उतरे पार इस पृथ्वी लोक पर सतगुरु देव ईश्वर के प्रतिनिधि के रूप में हम लोगों के मार्गदर्शन हेतु अवतरित होते हैं सतगुरु की शरणागत होने से हमारे भाग्य का उदय हो जाता है एवम हमारा मानव जीवन सार्थक हो जाता है सतगुरु की शरण में जाने से हमारे मस्तिष्क पटल में ज्ञान का उदय हो जाता है एवम हमारे ज्ञान चक्षु खुल जाते हैं वे लोग बड़े ही भाग्यशाली होते हैं जिन्हें गुरु की शरण प्राप्त होती है इस अवसर पर परम पूज्य स्वामी अमृतानंद महाराज ने कहा गुरु ज्ञान के दाता होने के साथ-साथ हमारी एक सच्चे मार्गदर्शक होते हैं जो अपने ज्ञान के माध्यम से हमारा लोक एवम परलोक दोनों सुधार इस अवसर पर श्री रुपेश पुरी महाराज बबली जी स्वामी उमेशानंद महाराज स्वामी राघवानंद महाराज महंत जगजीत सिंह महाराज महंत कमलेश्वरानंद महाराज सहित भारी संख्या में संत महापुरुष तथा भक्तजन उपस्थित थे


