हरिद्वार ( ऋषिकेश )
उपासना तेश्वर
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी, म म स्वामी दयाराम दास जी, पूर्व कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड, श्री प्रेमचन्द अग्रवाल जी, पूज्य संतों, वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों शिक्षकों, गुरूकुल के विद्यार्थियों की गरिमामयी उपस्थिति
ऋषिकेश, 9 अक्टूबर 2025। रामापैलेस, ऋषिकेश में आज दोपहर 2ः30 बजे से 5ः30 बजे तक उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के जीवन पर आधारित प्रेरणादायक फिल्म “अजय” की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की गई। इस अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, म म स्वामी दयाराम दास जी, पूर्व कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड, श्री प्रेमचन्द अग्रवाल जी, पूज्य संतों, वैज्ञानिकों, पर्यावरणविदों्, शिक्षकों, गुरूकुल के विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कर कार्यक्रम को गरिमामय बनाया।
फिल्म “अजय” में एक ऐसे साधक, संन्यासी और फिर एक कर्मयोगी नेता बनने की प्रेरक कथा के साथ योगी जी के राजनीतिक जीवन यात्रा का भी चित्रण है। बल्कि यह भी है। इसमें योगी आदित्यनाथ जी के जीवन के विभिन्न आयामों, उनकी साधना, त्याग, राष्ट्रभक्ति, सेवा और उत्तरप्रेदश को सशक्त बनाने के संकल्प को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। आज रामा पैलेस का पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा व जोश से परिपूर्ण हो उठा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि “यह मूवी नहीं, यह मूल है, यह फिल्म नहीं, एक फिलॉसफी है, जीवन जीने का एक दर्शन है कि जीवन जियो तो ऐसे जियो।” मूवी में दिखाए गए दृश्य केवल रोमांचित करने वाले ही नहीं, बल्कि रोम-रोम को संदेश देने वाले हैं। यह फिल्म रोमांचित करने के साथ-साथ रोंगटे खड़े कर देने वाली है।
वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश भय, भूख और भ्रष्टाचार के लिए जाना जाता था, और उसके बाद योगी जी ने उत्तर प्रदेश को “उत्तम प्रदेश” बना दिया। वास्तव में, यह फिल्म केवल रोमांचित करने वाली ही नहीं, बल्कि रोम-रोम खड़े कर देने वाली फिल्म है। इसमें इनोवेशन और परफेक्शन का अद्भुत सम्मिश्रण है। इस फिल्म ने सबको दिखा दिया कि योगी जी बचपन से ही योगी थे, एक ऐसे युवा, जिन्हें प्रभु ने केवल उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व को प्रेरणा देने के लिए गढ़ा है।
जब उनसे पूछा गया कि उन्हें क्या चाहिए, तो उन्होंने कहा “उद्देश्य।” बस आज यही ध्येय हर युवा का होना चाहिए। जब उद्देश्य हो तो सब कुछ त्यागना पड़ता है।
फिल्म के उस दृश्य पर “आज से तुम मुक्त हो, अपने पिछले कर्म से, हर बंधन से, तुम ही शून्य हो, तुम ही दुःख, तुम ही अनंत, तुम ही मोक्ष, तुम ही जन्म, तुम ही मृत्यु। न मां, न बाप, न पुत्र, न पत्नी आज तुम अजय आनंद नहीं, योगी आदित्यनाथ हो।” पूरा पैलेस तालियों से गूंज उठा।
इस फिल्म में कर्णछेदन के दृश्य को अत्यंत सजीव किया गया है। फिल्म देखते समय ऐसा प्रतीत होता है कि हम कोई सिनेमा नहीं, बल्कि योगी जी के जीवन की प्रत्येक धारा, प्रत्येक दर्शन को प्रत्यक्ष देख रहे हैं।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि “योगी आदित्यनाथ जी का जीवन किसी पद या सत्ता की कहानी नहीं, बल्कि यह राष्ट्रसेवा, सनातन मूल्यों और त्याग की यात्रा है। आज के युवाओं के लिए यह फिल्म केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि एक जागरण है और आदर्शों के प्रति समर्पण का एक अध्याय है कि जब एक साधक कर्मपथ पर चलता है तो समाज का मार्ग आलोकित होता है।
स्वामी जी ने जीवन में अपने राष्ट्र एवं समाज के लिए कुछ सार्थक करने का आह्वान करते हुये कहा कि जब समाज दिशाहीनता और मूल्यहीनता के संकट से जूझ रहा है, तब योगी जी जैसे प्रेरक जीवन समाज को संदेश देते हैं कि धर्म, अध्यात्म और राष्ट्रसेवा साथ-साथ चल सकते हैं। यही ‘नया भारत’ का मार्ग है।
गुरुकुलों के ऋषिकुमारों और विद्यार्थियों ने फिल्म के माध्यम से योगी जी के त्याग और दृढ़ संकल्प को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
फिल्म के दृश्यों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया, चाहे वह उनका बाल्यकाल हो, संन्यास की दीक्षा का क्षण, या फिर जनसेवा का संकल्प। दर्शकों ने एक स्वर में कहा कि यह फिल्म केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि “राष्ट्र निर्माण के एक युगपुरुष की जीवंत गाथा” है।
कार्यक्रम में स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों ने भी बड़ी संख्या में भाग लिया और फिल्म के सामाजिक तथा सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित किया। आयोजन के अंत में सभी ने भारत माता और सनातन संस्कृति के प्रति अपनी निष्ठा और संकल्प को पुनः दोहराया।
यह विशेष स्क्रीनिंग केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक और राष्ट्रभक्ति के भावों से ओतप्रोत समागम है।
पूरा हॉल दर्शकों से खचाखच भरा हुआ था। इतनी भीड़ थी कि कई लोग सीटें न मिलने पर नीचे बैठकर बड़े ही उत्साह और श्रद्धा से अपने प्रिय नेता, माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के जीवन पर आधारित फिल्म “अजय” को देख रहे थे।
हर दृश्य पर दर्शकों की आंखों में चमक और हृदय में गर्व की लहरें दौड़ रही थीं। फिल्म में दिखाए गए संस्मरणों, तप, त्याग और राष्ट्रसेवा की झलक ने वातावरण को भावविभोर कर दिया। लोगों ने इसे केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि एक जीवन प्रेरणा का महोत्सव बताया।
फिल्म “अजय” की विशेष स्क्रीनिंग हेतु पूरे संत समाज, गणमान्य अतिथियों को आमंत्रित किया। परमार्थ निकेतन द्वारा इस आयोजन की पूरी व्यवस्था करायी गयी। संत समाज थियेटर में पहली बार आकर इतना आनंद का अनुभव कर रहे थे। थियेटर में आकर कुछ लोग पहले तो चकित थे परन्तु जैसे ही अपने प्रिय नेता कि चरित्र को स्क्रीन में देखा तो गद्गद हो उठें।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अजय फिल्म के निर्देशक रविन्द्र गौतम जी, लेखक प्रियंक दुबे, दिलीप झा, श्री शांतनु जी और पूरी टीम तथा रामा पैलेस के प्रमुख का अभिनन्दन किया।


