हरिद्वार
हरिद्वार में हैलोनिक्स कम्पनी की सी.एस.आर. परियोजना के अंतर्गत स्किल ट्रेनिंग ले रहे विद्यार्थियों के लिए गौरैया जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया। ब्यूटी वेलनेस और इलेक्ट्रिकल जगत के विद्यार्थियों हेतु यह सत्र ज्वालापुर स्थित एमटीपी चैरिटेबल सोसायटी द्वारा आयोजित किया गया। इस सत्र में उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के पर्यावरणीय जागरूकता प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी डॉ. विनय सेठी ने प्रतिभागियों को गौरैया की घटती संख्या के कारण एवं समाधान से अवगत कराया।डॉ. सेठी ने कहा कि गौरैया पक्षी पर्यावरणीय एवं सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। परंतु विगत कुछ वर्षों से इसकी संख्या निरंतर घटती जा रही है।
डॉ. सेठी ने बताया कि लकड़ी के कृत्रिम घोसले गौरैया के संरक्षण में कारगर सिद्ध हो रहे हैं। यदि हम अपने घर आंगन में इन घोसलों को लगाते हैं तो गौरैया की घटती संख्या को रोका जा सकता है। उन्होंने प्रतिभागियों से घरों में मेहंदी, अमरुद, नींबू, कनेर, बोगनविलिया, हरसिंगार, मधुमालती, चमेली, अनार, मोतिया जैसे पौधे लगाने की भी अपील की, जो गौरैया को विश्राम एवं सुरक्षा का बेहतर स्थान उपलब्ध कराते हैं।
समिति के अध्यक्ष विनय गर्ग ने कहा कि आज हमें जागरुक होने की गहरी आवश्यकता है अन्यथा आने वाली पीढ़ियां गौरैया पक्षी को देख नहीं पाएंगी। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही उनकी समिति द्वारा हरिद्वार में गौरैया के घोसले लगाने का वृहद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।इस जागरूकता सत्र में प्रतिभागी अनेक बार गौरैया की मार्मिक स्थिति को देखकर भावुक हुए तथा उन्होंने प्रण लिया कि वे इस पक्षी के संरक्षण में अपना योगदान देंगे।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों के साथ साथ प्रोजेक्ट मैनेजर आलोक श्रीवास्तव, प्रदीप उपाध्याय, शिवम वर्मा, मनीषा, प्रवेश, सोहन, देव आदि उपस्थित रहे।


